Life and Journey of Superstar

भारतीय सिनेमा के पहले सूत्रधार वी. शांताराम
antaram - Copy.jpg                      "आधा है चंद्रमा"  ..... "तू छुपी  है कहाँ"  ऐसे ना जाने कितने सुरीले गीत और नृत्य से भरपूर फ़िल्मे निर्देशित करने वाले  वी. शांताराम को हिन्दी फिल्मों मे सपनो से भरी दुनिया परोसने वाले  निर्माता निर्देशक के रूप मे जाना जाता है. किंग ऑफ रोमॅन्स यश चोपड़ा  ने हमेशा माना की फिल्म विजया के बाद उन्होंने  अपनी फ़िल्मो मे शांता राम से काफ़ी प्रेरणा ली जो वास्तविक जीवन मे उनके लिए प्रेरणा दायक रहे है यहा तक की फिल्म दाग के निर्माण के वक़्त यश चोपड़ा को अपने ऑफीस मे ही जगह दी.18 नवम्बर 1901 को कोल्हापुर  मे विश्वकर्मा परिवार मे जन्म हुआ जो की मूलत मराठी ही थे सो बचपन से उनका लालन पालन उसी परिवेश मे हुआ.1921 मे बनी साइलेंट फिल्म सुरेखा हरण  से एक अभिनेता के रूप मे अपना कैरियर शुरू किया. उन्हे फिल्म निर्माण और संगीत की गहरी रूचि थी इस वजह से ही वो जल्द  फिल्म निर्माण और निर्देशन मे आ गये. नेताजी पालेकर (1927) से वो निर्माता निर्देशक के रूप मे सबके सामने आए .यह दौर हिन्दी फिल्मी दुनिया का शुरूआती दौर था जिसे लंबा सफ़र तय करना था जिसकी बिसात दादा साहेब और वी. शांताराम ने लिखी.वी. शांताराम हमेशा ज़माने के साथ चले वो जानते थे की ऐतिहासिक पात्र उस वक़्त लोगो को बेहद पसंद थे अभी तक लोग उन्हे सिर्फ़ नाटको या कहानियो मे ही देखते है लेकिन उन्होने मूक फिल्म के उस दौर मे भी एक से एक ऐतिहासिक फ़िल्मे बनयाई जिनमे गोपाल कृष्णा (1929),अयोध्या का राजा, 1932,चंडरासेना(1935). दौर बदला आज़ादी के बाद फ़िल्मे बोलने लगी इससे शांताराम भी अच्चुटे ना रहे ,समय के साथ उन्होने फ़िल्मो का विषया भी बदला, तब उन्होने परबत पे अपना डेरा DABH-1.jpg(1944),माली(1944),ड्र. कोटनिस की अमर कहानी (1946),लोकशाहीर रम्जोशी(1947),अपना देश(1949),दहेज( 1950) जैसी उम्दा संजैक फ़िल्मे बनाई.कई फ़िल्मो के निर्माण के बाद आई फिल्म झणक झणक पायल बाजे , 1955 मे आई इस फिल्म मे शांताराम की पत्नी संध्या और डॅन्सर गोपी कृष्णा की जोड़ी थी इस फिल्म से वी. शांताराम को ऐसी पहचान मिली जिसके वो सही हकदार थे.यह फिल्म काफ़ी हद तक रंगीन फिल्म थी और भारत के सुरुआती दौर के कुछ चुनिंदा फ़िल्मो से एक थी. डान्स और संगीत के पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म ने हिन्दी फ़िल्मो को सफलता का नया मंत्र गानो के रूप मे दिया. वसंत देसाई के संगीत और हसरत जयपुरी के लिखे गाने और लता द्वारा गाए गीतो ने धूम मचा दी , इस फिल्म का एक गीत "जो तुम तोडो पिया" फिल्म सिलसिला मे यश चॉप्रा ने डाला जो बाद मे भी खूब लोक प्रिय हुआ.शांताराम ने फिल्म मे कई भारतीय संगीत वाद्य यंत्र का प्रयोग किया जिसमे शिवकुमार शर्मा का संतूर भी था, भारतीय सिनेमा मे पहली बार संतूर का  प्रयोग किया गया फिल्म झनक झनक  पायल बाजे ने उस उस वर्ष  का फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ट फिल्म का अवार्ड मिला .फिर आई वो फिल्म जिसका इन्तजार  पूरा फिल्म जगत कर रहा था, 1957 मे आई फिल्म दो आँखें बारह हाथ मे ब शांता राम ने ना सिर्फ़ निर्देशन की भूमिका निभाई बल्कि मुख्य भूमिका जैल वॉर्डन की खुद निभाई ,फिल्म के निर्माता भी वो खुद ही थे. फिल्म की कहानी एक ऐसे जैल वॉर्डन की थी जिसमे वो 6 कड़ियो को सुधरते हुए नज़र आते है. हिन्दी फ़िल्मो  मे बिना हीरो हीरोइनों के भी कहानी गढ़ी जा सकती इसे शांता राम ने बखुबी कर दिखाया . फिल्म मे लता का गया गाना "आए मालिक तेरे बंदे हम"  आज भी लोगो की ज़ुबान पर है इस फिल्म ने 1957 के लिए नॅशनल फिल्म 1_zpsabddffae.jpgअवॉर्ड्स कैटगरी मे बेस्ट फीचर फिल्म और बेस्ट फीचर फिल्म इन हिन्दी का अवॉर्ड जीता. 1959 मे आई फिल्म नवरंग ने शान्त राम के निर्देशन का एक और सुनहरा अध्याय जोड़ दिया इस फिल्म मे शांता राम  निर्देशक पर्दे पर भी कुछ समय के लिए सामने आए बाद मे इसी सिलसिले को शोमैन शुभाष घई ने भी अपनाया. इस फिल्म के कुल 12 गाने थे नृत्य संगीत से भरे इस फिल्म को भी दर्शको ने खूब पसंद  किया.आधा है चंद्रमा"  फिल्म के  गाना से फिल्मी दुनिया को एक मशहूर गायक महेंद्रा केपर मिला . इस फिल्म मे आशा भोसले के साथ उनकी जुगल बंदी हमेशा हमेशा के लिए अमर हो गयी. आगे चल कर उन्होने कई यादगार फ़िल्मे बनाई जिनमे गीत गया पठारों ने(1964),जल बिन मच्चली नृत्य बिन बिजली(1971) और पिंजरा (1973) खास रूप से गिनी जा सकती है. 1985 मे उन्हे दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड और 1992 मे पद्म विभूषण अवॉर्ड से सन्मानित किया गया. जंजीर उनकी आखरी फिल्म थी जो निर्माता निर्देशक के रूप मे  1987 मे पर्दे पर आई.उस वक़्त उनकी उम्र 85 साल थी इसे से फ़िल्मो के प्रति उनके जज़्बे का पता चलता है. शांताराम ने तीन बार शादी की. उनकी पहली शादी विमला के साथ हुई थी दूसरी शादी अभिनेत्री जयश्री से की जिनसे उन्हें तीन संताने है निर्देशक किरण शांताराम , अभिनेत्री राजश्री और तेज श्री।  वी शांताराम के जीवन में की तीसरी पत्नी के तौर पर अभिनेत्री संध्या आई जिन्होंने फिल्म दो आँखे बारह हाथ के साथ 5750922053_76ba245fb7_z.jpgही झनक  झनक पायल बाजे , नवरंग , जल बिन मछली , नृत्य बिन बिजली जसी फिल्मो में नजर आई।  वी. शांताराम एक ऐसे निर्देशक है जिन्होंने राजश्री और अभिनेता जितेन्द्र को 1964 में फिल्म 'गीत गाता चल' के साथ लांच किया  30 अक्टोबर 1990 को उन्होने मुंबई मे आखरी साँस ली.भले ही आज वो ह्मारे बीच नही है लेकिन वो  भारतीय सिनेमा  के इतिहास के शुरुवाती पन्नो  में एक ऐसे  निर्माता .निर्देशक  और अभिनेता थे जिनसे हिन्दी फ़िल्मो का सुनहरा दौर की शुरुवात हुई वह अपने गीत ,संगीत और नृत्य प्रधान फ़िल्मो ले किए वी हमेशा याद किए जाएँगे.