Life and Journey of Superstar

"आम लोगो का सबसे ख़ास किरदार फ़ारूख़ शैख़"
BL29_14_FAROOQ1_1701488f - Copy.jpg                    हिन्दी सिनेमा हमेशा से ऐसे कलाकारो और अभिनेताओ को हमारे बीच प्रस्तुत करता रहा है जिन्होने व्यवसायिक और कला फ़िल्मो की दीवारो को ताड़ दर्शको के दिल को छुआ है. अभिनेता फ़ारूख़ शैख़ कुछ इसी तरह के शख्स थे उनकी प्रतिभा के लिए रंगमंच , फ़िल्मे या टीवी किसी भी माध्यम मे उनकी प्रतिभा के लिए शब्द कम पड़ जाते है फ़ारूख़ शैख़ का जन्म अमरोली बड़ौदा शहर , गुजरात मे २५ मार्च १९४८ मे हुआ था पिता मुस्तफ़ा शैख़ मुंबई मे वकील थे पाँच भाइयो मे सबसे बड़े फारुख शैख़ एक ज़मीदार परिवार से ताललु रखते थे इसलिए उनका बचपन हमेशा सुख सुविधाओ से युक्त था  मुंबई के सेंट मैरी स्कूल में शुरुआती शिक्षा ग्रहण करने के साथ ही उन्होंने यहां के सेंट जेवियर्स कॉलेज में आगे की पढ़ाई की। बाद में उन्होंने सिद्धार्थ कॉलेज ऑफ लॉ से कानून की पढ़ाई की। . फ़ारूख़ शैख़ ने इसके बार रूपा जैन से शादी की जिनसे वह पिछले आठ वर्षो से प्यार करते थे  
कॅरियर
सत्तर के दशक से अभिनय की शुरूवात करनेवाले फ़ारूख़ शैख़ ने चालीस वर्षो से भी अधिक तक भारतीय सिनेमा मे लोकप्रिय फ़िल्मो मे अभिनय किया तो कई मिल के पत्थर किरदारो को पर्दे पर अमर कर दिया  भारतीय अभिनेता, समाजसेवी और टेलीविजन प्रस्तोता रहे  फारुख शेख ने अपने कॅरियर की शुरुआत थियेटर से की थी। उन्होंने सागर सरहदी के साथ मिलकर कई नाटक भी किए हैं। बॉलीवुड में उनकी पहली बड़ी फिल्म 'गरम हवा' थी जो 1973 में आई थी। फिर उसके बाद महान फिल्मकार सत्यजित रे के साथ 'शतरंज के खिलाड़ी' की। शुरुआती सफलता मिलने के बाद फारुख शेख को आगे भी फिल्में मिलने लगीं जिसमें 1979 में आई 'नूरी', 1981 की चश्मे बद्दूर जैसी फिल्में शामिल हैं।
अस्सी के दशक मे फारुख शैख़ कई फ़िल्मो मे नज़र आए किसी ना कहना से ना कहना , कथा , एक बार चले आओ , रंग बिरंगी लाखो की बात, अब आएगा मज़ा यहाँ वहाँ , लॉरी फ़ासले, सलमा, एक पल , अंजुमन , खेल मुहब्बत का , राजलक्ष्मी , पिच्छा करो , घरवाली बाहरवाली , बीबी हो टॉप ऐसी , दूरसा क़ानून , मेरा दामाद, तूफान   

28039182.cms.jpgनब्बे के दशक मे जाने ए वफ़ा , माया मेमसाब , अब इंसाफ़ होगा , मुहाब्ब्त प्रमुख फ़िल्मे रही फ़िल्मो की भूमिकाए बहुत सफल रही   तो सन २००० के बाद सास बहू और सेंसेक्श , लाहौर , आक्सीडेंट आन हिल रोड जैसी फ़िल्मो के द्वारा वह दर्शको मे अपनी उपस्त्ति करते रहे  

२०११ में टेल मी ओ  खुदा, , २०१२ शंघाई लिसेन अमाया २०१२  , ये जवानी है दीवानी  २०१३ और क्ल्ब ६० २०१३ जैसी फिल्म मे नज़र आए इसमे सबसे महत्वपूर्ण फिल्म लिसेन अमाया थी जिसमे एक लम्बे अंतराल के बाद फाहरुख शैख़ और डिप्टी नवाज की जोड़ी पर्दे पर नज़र आई तो क्ल्ब ६० मे भी उनका अभिनय दर्शको द्वारा सराहा गया   फ़िल्मो के साथ ही उनका रंगमंच से जुड़ाव बना रहा अभी तक वह अपने सबसे हिट नाटक तुम्हारी अमृता का मंचन करते रहे जिसमे उनके साथ शबाना आज़मी की जोड़ी को दर्शको ने बहुत पसंद किया  छोटे पर्दे पर लोकप्रिय शो जीना इसी का नाम है भी दर्शको ने बहुत पसंद किया  



किरदार को जीने वाला  कलाकार
अभिनेता फारुख शेख ऐसे कलाकारों में शुमार हैं जो बड़े और असाधारण श्रेणी के फिल्मकारों की फिल्मों में एक खास किरदार के लिए पहचाने जाते हैं या फिर उसी खास किरदार के लिए बने हैं। ऐसे अभिनेता पर्दे पर केवल अभिनय नहीं करते बल्कि उस अभिनय को जीते हैं। ऐसे किरदार ही आपके जहन में इतना प्रभाव छोड़ जाते हैं कि आप उन्हें लम्बे समय तक याद रखते हैं। सहज और विनम्र से दिखाई देने वाले फारुख शेख ने अपने समय के चोटी के निर्देशकों के साथ काम किया है। उन्होंने सत्यजित रे, मुजफ्फर अली, हृषिकेश मुखर्जी, केतन मेहता, सई परांजपे, सागर सरहदी जैसे फिल्मकारों का अपने अभिनय की वजह से दिल जीत लिया।

सबसे सफल रही दीप्ति नवल के साथ जोड़ी  
amaya3--621x414.jpgदीप्ति नवल और फारुख शेख की जोड़ी सत्तर के दशक की सबसे हिट जोड़ी रही। दर्शक इन्हें फिल्मों में एक साथ देखना चाहते थे। इन दोनों ने एक साथ मिलकर कई फिल्में की इसमें चश्मे बद्दूर, साथ-साथ, कथा, रंग-बिरंगी आदि प्रमुख हैं।फारुख शेख अपने किरदारों में जुझारू, मध्यमवर्गीय और मूल्यजीवी इन्सान के साथ-साथ मनुष्य की फितरत को भी अभिव्यक्त करने के लिए जाने जाते हैं। उनकी हाल की फिल्मों में सास बहू और सेंसेक्स, एक्सीडेंट ऑन हिल रोड और लाहौर जैसी फिल्में रहीं। इन फिल्मों में भी एक बार फिर उनकी परिपक्व छवि दिखी।

अपने सशक्त अभिनय की बदौलत आम लोगों को बहुत ज्यादा प्रभावित करने वाले कलाकारों में से एक फारुख शेख  65 वर्ष   का 27 दिसंबर, 2013 को दिल का दौरा पड़ने से दुबई में निधन हो गया।