Life and Journey of Superstar

संगीतमयी रंगीन फिल्मों के सबसे आकर्षक अभिनेता शम्मी कपूर !
             Shammi7.jpg   फिल्म 'नगरी 'में सबसे अलग जगह बनायी. कभी अभिनेत्री सायराबानों ने एक साक्षात्कार में कहा था की जिस समय हिंदी फिल्मों में दिलीप साहब , राज कपूर और देव आनंद सबसे सफल अभिनेता थे उस समय शम्मी कपूर एक अकेले ऐसे अभिनेता थे जिन्होंने खुद की अलग पहचान बनाई . पच्चास के दशक के अंत से सत्तर के दशक तक वह भारतीय फिल्मों के अकेले डांसिंग (नृत्य) अभिनेता थे जबकि उन्हें यह नहीं पता था की नृत्य क्या होता है  . वह तो बस संगीत सुनकर महसूस करते थे . उन्हें कभी नृत्य निर्देशक की जरुरत नहीं पड़ी इसलिए उन्हें भारतीय फिल्मों का एल्विस प्रेस्लय कहा जाता है . 


 हिंदी फिल्मों के अभिनेता बहुत ही संकोची और व्यवहार से सिमित सरल रहते थे . ऐसे में शम्मी  कपूर एक ऐसे व्यक्तित्व के मिश्रण थे जिन्हें देखकर लड़कियां सहज ही आकर्षित होती थी . वह हिंदी फिल्मों के पहले अभिनेता थे जिन्होंने पश्चिमी पहनावे का फैशन शुरू किया . यह उनके अभिनय में भी देखने को मिलता हैं . चमड़े के जैकेट और टी शर्ट बहुत ही लोकप्रिय हुए . खास तौर पर टी शर्ट का चलन उन्होंने ही शुरू किया क्योंकि तब तक हिंदी फिल्मों में टी शर्ट का प्रचलन एकदम से नहीं था . आम कॉलर्स वाले कपड़ों से इतर वह कैजुअल फैशन को वरीयता देते थे जो उनके स्टार व्यक्तित्व को बढ़ाता था.


शम्मी कपूर की फ़िल्मी शुरुआत इतनी आसान और संगीतमय नहीं थी . भारतीय फिल्मों के पहले परिवार पृथ्वीराज कपूर के बेटे शम्मी कपूर की शुरुआत अपने बड़े भाई राज कपूर के निर्देशन में हुई . शम्मी कपूर (शम्मे राज कपूर ) ने अभिनय का सफर १९५२ में फिल्म ' जीवन ज्योत ' के साथ शुरू किया . इस फिल्म में उनके साथ अभिनेत्री चांद उस्मानी थी . फिल्म के निर्देशक महेश कौल थे . कैरियर   के शुरूआती दौर में मधुबाला के साथ ' रेल का डिब्बा 'और 'नकाब ' अभिनेत्री नूतन के साथ 'लैला मजनू ' श्यामा के साथ ' ठोकर ', नलिनी जयवंत के साथ 'हम सब चोर है ' जैसी फिल्मों में अभिनय किया जो दर्शकों के बीच अपनी पहचान बनाने में सफल रही .१९५५ में अभिनेत्री गीता बाली के साथ विवाह के साथ ही वह एक बच्चे के पिता भी बन गए . अभिनेत्री गीता बाली ने यह सबसे पहले महसूस किया की शम्मी कपूर रोमांटिक हीरो के इमेज बाहर आना चाहते है . यह अवसर उन्हें जल्द ही मिल गया . फिल्मिस्तान बैनर की निर्देशक नासिर हुसैन की फिल्म 'तुमसा नहीं देखा ' के साथ ही शम्मी कपूर ने अपना  इमेज बदल दिया . अपनी पतली सी मुछों के साथ मद मस्त होकर झूमते नजर आये . इस नये लूक में उनकी अनोखी आंखे सबको भा गयी . संगीत निर्देशक ओ पी नैयर की धून - 'यूं तो हमने लाख हसीं देखे हैं ', 'छुपने वाले सामने आ ', 'आये हैं दूर से मिलने हजुर से ', 'तुमसा नहीं देखा ' ने शम्मी कपूर को स्टार बना दिया. 


गहरी नीली आंखे .....जिसमें करोड़ो दिल डुब गये .....कभी न भूलने वाली अदाएं जो साठ के दशक में रोमांटिक स्टाइल की प्रतीक बन गयी . उनका नाम जब भी जेहन में आता है उसके साथ ही याद आ जाता है रॉक एंड रोल , संगीत , नृत्य . शम्मी कपूर ने अपने तेज आवाज में  याहू से साठ के दशक के सिनेमा की तस्वीरों में रंग भरा ...कुछ साल पहले शम्मी कपूर हमेशा के लिए खामोश हो गये लेकिन छोड़ गए एक रोमांटिक अभिनेता के साथ ही एक आकर्षक व्यक्तित्व जो पीढ़ियों के लिए लोगों को लुभाता रहेगा .


हिंदी फिल्मों में उनका जादू एस मुखर्जी की फिल्म जंगली (१९६२) से शुरू हुआ जब थोड़े से थुथले शम्मी कपूर कश्मीर की बर्फीली वादियों में हिरोइन का पीछा करते नजर आये . यह वह दौर था जब भारतीय फिल्म उधोग श्वेत श्याम से कलर हो गया था और देश की आजादी की जश्न में डूबी जनता को शम्मी कपूर की रॉक एंड रोल अदाओं और शंकर जय किशन , ओ पी नैयर के संगीत पर झुमने को मजबूर कर दिया था .  


शम्मी कपूर कश्मीर की वादियों में झूमते नजर आये तो , पेरीस में शामें बितायी या फिर मुंबई की गलियों में सायरा बानो , आशा पारेख , शर्मिला टैगोर के साथ दर फिल्म सफलता की कहानी लिखते गये . उन्होंने हालांकि इस फिल्म के बाद निर्देशक नासिर हुसैन ने शम्मी कपूर की इमेज को पूरी तरह से बदलने का फैसला लिया और फिल्म 'तुमसा नहीं देखा ' के साथ ही नये बॉब कट हेयर स्टाइल , स्टाइलिस्ट जिंग के साथ ही शम्मी कपूर हॉलीवुड के जेम्स डीन के भारतीय संस्करण बन गये . ओ पी नैयर की धूम ' जवानिया ये मस्त मस्त बिन पिये ' के साथ साथ शम्मी कपूर नजर आते हैं . यह एक उनकी हमेशा के लिए बनाने वाली पहचान थी हिंदी फिल्मों का एक शरारती आशिक मिजाज अभिनेता फिल्म ' तुमसा नहीं देखा ', 'उजाला ', 'दिल दे के देखो ' की हैट्रिक सफलता के साथ ही वह बड़े स्टार बन गये . लेकिन १९६० में फिल्म 'जंगली 'के साथ फिल्म प्रचारक बन्नी रुबेन ने द रेबेन स्टार का तमगा दिया . जो देव आनंद , राज कपूर और दिलीप कुमार को टक्कर देते थे . साठ के दशक में गायक मोहम्मद रफी एक के बाद एक सफल गीत के शम्मी कपूर की आवाज बने . ' खुली पलक में झूठा गुस्सा ', 'ओ हसीना जुल्फों वाली ', 'बदन पे सितारे लपेटे हुए ', जैसे गीतों को उनके चाहने वालों के बीच लोकप्रिय बना दिया . 


१९६९ में हिदीं फिल्मों में सुपर स्टार राजेश खन्ना का दौर शुरू हुआ . थोड़े से थूथले शम्मी कपूर के रोमांटिक अभिनेता की छवि धीरे धीरे धुंधली होती गयी . बतौर मुख्य अभिनेता १९७१ में 'अंदाज '  सबसे सफल फिल्म थी . धीरे धीरे शम्मी कपूर चरित्र भूमिकाएं करने लगे . 


फिल्म 'जमीन ', हीरो ', 'विधाता ', 'तहलका ', हुकूमत ', 'बटवारा ', 'चमत्कार ' , और ' प्रेम ग्रंथ ', में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई . १९७४ में शम्मी कपूर ने बतौर निर्देशक फिल्म 'मनोरंजन' और 'बंडलबाज 'जैसी फिल्मो में काम किया . जो की यह दोनों ही फिल्मे बॉक्स ऑफिस पर असफल रही . हालांकि यह फ़िल्में थोड़ी बहुत  पसंद की गयी थी  . 
आखिरी बार वह २००६ में फिल्म 'सैंडविच ' में नजर आये और २०११ में उन्होंने अपने नाती रणबीर कपूर के साथ फिल्म 'रॉक स्टार 'में अभिनय किया जो उनकी आखरी प्रदर्शित फिल्म थी . 


स्वास्थ्य की अनियमितताओं के चलते उन्हें लगातार डायलिसिस लेना पड़ता था . १४ अगस्त  २०११ को शम्मी कपूर हम सबको अलविदा कह कर चले गये . लेकिन साठ के दशक के संगीतमयी रंगीन फिल्मों के सबसे आकर्षक अभिनेता के तौर पर उन्हें याद किया जायेगा . एक फ़िल्मी पत्रिका के सर्वेक्षण ने उन्हें हिंदी फिल्मों का सबसे लोकप्रिय डांसिंग स्टार चुना था तो आज भी शम्मी कपूर के फिल्मों की डीवीडी की मांग सबसे अधिक रहती है .