Life and Journey of Superstar

रोमांटिक अंदाज वाले (आनंद) राजेश खन्ना !
               rajesj.jpg       निर्देशक हृषिकेश मुखर्जी की फिल्म 'आनंद ' का क्लाइमेक्स दृश्य आनंद सहगल ( राजेश खन्ना ) के चेहरे पर पल पल बढ़ती मौत दिखाई दे रही है . दोस्त से जुदा होने के गम के इस पल को उन्होंने परदे पर बड़ी संजीदगी से जिया . अपने दोस्त के इंतजार में आखिर जिंदगी की डोर उनका साथ छोड़ देती , लेकिन दर्शक उस आनंद के किरदार और दर्शन को अपने साथ सिनेमा हाल से बाहर लेकर निकलते हैं . यह तो सिर्फ एक ही रंग था उनकी अभिनय प्रतिभा का जो भारतीय सिनेमा के दर्शकों पर कभी न भुलानेवाली छाप छोड़ गया . २९ दिसंबर १९४२ को अमृतसर में जन्मे राजेश खन्ना का वास्तविक नाम जतिन खन्ना है . बॉलीवुड में आमतौर पर सुपरस्टार्स बनानेवालों की तरह ही उनका भी कैरियर शुरू में संघर्षमय रहा लेकिन एक बार उन्होंने जो सफलता की सीढियों पर कदम रखा तो अगले डेढ़ दशक तक वह अकेले सुपरस्टार बनकर छाए रहे . 


राजेश खन्ना का पालन पोषण उनके माता -पिता के रिश्तेदारों ने किया था , जो मुंबई में गिरगांव के निकट ठाकुरद्वार में रहते थे . वहां पर उन्होंने सेंट सबेस्तियन हाईस्कूल में शिक्षा ली .यहां पर उनके दोस्त रवि कपूर थे जो आगे चलकर जीतेंद्र कपूर के नाम से एक सफल अभिनेता साबित हुए . बचपन से अभिनय के शौकीन राजेश खन्ना प्राय : थियेटर से जुड़े रहे और अक्सर कॉलेज के समारोह में हिस्सा लेते थे . कॉलेज के दिनों में कई बार नाटक प्रतियोगिताओं में उन्हें पुरस्कार भी मिला . दोनों दोस्त आगे चलकर मुंबई के किशनचंद चेलाराम (केसी) कॉलेज में दाखिला लिया . यहां एक रोचक तथ्य यह भी है की जब जीतेंद्र एक किरदार के लिए अपना पहला ऑडिशन देने जा रहे थे तो उन्हें राजेश खन्ना ने ही अभिनय के गुण सिखाये थे . आगे चलकर राजेश खन्ना ने फिल्मों से जुड़ने का मन बनाया . यह उनके चाचा जी थे जिन्होंने उन्हें जतिन से राजेश खन्ना बनाने की सलाह दी .


उनके फ़िल्मी कैरियर की शुरुआत १९६५ यूनाइटेड प्रोड्यूसर्स और फिल्मफेयर द्वारा आयोजित एक प्रतिभा प्रतियोगिता की जीत से हुई बतौर अभिनेता राजेश खन्ना की पहली फिल्म १९६५ में 'आखिरी खत' प्रदर्शित फिल्म के निर्देशक चेतन आनंद थे इसके बाद उनकी दूसरी फिल्म 'राज 'का प्रदर्शन हुआ . यूनाइटेड प्रोड्यूसर के साथ हुए अनुबंध के अंतर्गत राजेश खन्ना को 'औरत ' ,'डोली' 'इत्तफाक 'जैसी कई और फिल्मों में भी अभिनय किया . लेकिन कैरियर के शुरूआती दौर में फिल्म 'बहारों के सपने ', 'औरत ','डोली ', 'आराधना 'और 'इत्तफाक ' जैसी किरदारों के उनके अभिनय को पहचान दी . लेकिन इन सभी फिल्मों में १९६९ में आई फिल्म 'आराधना 'ने राजेश खन्ना के कैरियर को नई उड़ान दी और देखते ही देखते वह युवा दिलों की धड़कन बन गए . फिल्म में अभिनेत्री शर्मिला टैगोर के साथ उनकी जोड़ी बहुत पसंद की गई  और वह हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार बनकर प्रशंसकों के दिलो दिमाग पर छा गए .उनके कैरियर ने एक बार जो सफलता की तरफ कदम बढाया फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा .
भारतीय सिनेमा के इतिहास में १९६९से १९७२ के समय में १५ लगातार हिट फिल्मों का रिकॉर्ड आज भी कोई अभिनेता नहीं तोड़ पाया . राजेश खन्ना को आनंद में यादगार अभिनय के लिए वर्ष १९७२ में लगातार दूसरी बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर अवार्ड दिया गया फिर तीसरे साल भी उन्हें आविष्कार फिल्म के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया गया . 
वैसे तो राजेश खन्ना ने अनेक अभिनेत्रियों  के साथ काम किया लेकिन शर्मिला टैगोर और मुमताज के साथ उनकी जोड़ी खासतौर पर लोकप्रिय हुई . उन्होंने शर्मिला टैगोर के साथ फिल्म आराधना ,सफल ,,बदनाम ,फरिश्ते ,छोटी बहु ,अमर प्रेम, राजा रानी और आविष्कार में जोड़ी बनाई ,जबकि दो रास्ते, बंधन ,'दुश्मन ', 'अपना देश ,'आपकी कसम ', 'रोटी 'तथा ' प्रेम कहानी 'में मुमताज के साथ उनकी जोड़ी बहुत पसंद की गई . हिट फिल्मों के साथ ही उनकी फिल्मों का संगीत भी लोकप्रिय रहा . संगीतकार आर .डी. बर्मन और गायक किशोर कुमार के साथ राजेश खन्ना की जुगलबंदी  ने अनेक हिंदी फिल्मों को सुपरहिट संगीत दिया . 


राजेश खन्ना १९६९ में फैशन डिजाइनर अंजू महेन्द्रू के साथ अफेयर के लिए चर्चो में रहे लेकिन वर्ष १९६३ में खुद से उम्र में काफी छोटी नवोदित अभिनेत्री डिम्पल कपाड़िया से विवाह किया . यह भी एक रोचक घटना है . एक अवार्ड समारोह के दौरान दोनों मिले और फिर राजेश खन्ना के शादी के  प्रस्ताव को डिम्पल ने झट से स्वीकार कर लिया हालांकि राजेश और डिम्पल का वैवाहिक जीवन ज्यादा दिन तक नहीं चल सका और कुछ समय बाद वे अलग हो गए .करीब डेढ़ दशक तक प्रशंसको के दिल पर राज करने वाले राजेश खन्ना के करियर में ८० के दशक के बाद उतार शुरू हो गया .  
१९७४ से १९७९ यह राजेश खन्ना के कैरियर का दूसरा दौर था जिसमें उन्होंने कई ऐसी फ़िल्में दी  जिसे व्यावसायिक सफलता नहीं मिली . इसलिए कई ऐसी फिल्म थी जिसे समीक्षकों ने तो सराहा लेकिन दर्शकों को कम भायी . महबूबा (निर्देशक शक्ति सामंत ), बण्डल बाज (निर्देशक शम्मी कपूर ), त्याग (निर्देशक दिन दयाल शर्मा ), पलकों की छांव में (हृषिकेश मुखर्जी ), नौकरी (बासु चटर्जी ), चक्रव्यूह और जनता हवलदार (महमूद अली )फ़िल्में खास रही . निर्देशक शक्ति सामंत और राजेश खन्ना की फ़िल्में एक सफल संयोग था लेकिन फिल्म 'महबूबा ' इसके विपरीत साबित हुई . राजेश खन्ना ने अपने अच्छे संबंधो के चलते शक्ति सामंता से कहकर अपनी साली सिंपल कपाड़िया को फिल्म 'अनुरोध'में काम दिलवाया लेकिन यह फिल्म भी राजेश खन्ना की असफल फिल्मों में गिनी जाती है . रोमांटिक अभिनेता की छवि से बाहर आकर सामाजिक फिल्मे और फिर एक्शन फिल्मों में राजेश खन्ना का चुनाव दर्शकों ने अस्वीकार कर दिया था . देश में इमर्जेन्सी का समय था एक ऐसा दौर जब भ्रष्टाचार पर एक युवक के संघर्ष को फिल्म 'चेला बाबु ' के जरिये दर्शकों ने बहुत पसंद किया . अस्सी के दशक के साथ राजेश खन्ना ने कई सफल फ़िल्में दीं. अमरदीप ,फिर वही रात , बंदिश ,(१९५४) थोड़ी -सी बेवफाई,  दर्द ,कुदरत ,खानदान, अवतार , अगर तुम न होते ,सौतन ,जानवर ,आशा ज्योति ,नया कदम ,हम दोनों ,बाबु , आज का एकएमएल,  राम अवतार ,शत्रु  इंसाफ   मैं करूंगा, अनोखा रिश्ता, नजराना , अंगारे , अधिकार (१९८६ ) फिर अस्सी के दशक में टीना मुनीम और राजेश खन्ना परदे के बाहर कुछ चर्चे में रहे .फिल्म जैसे फिफ्टी -फिफ्टी ,सुराग ,सौतन ,आखिर क्यूं,बेवफाई ,इंसाफ मैं करूंगा और अधिकार (१९८६ )में मिला . इस जोड़ी की सफल फिल्म रही .राजेश खन्ना मल्टी स्टारर फिल्मों में भी अभिनय किया .राजपूत ,धरम और कानून ,(१९६५)जमाना ,दिल -ए-नादां, अशांति ,अवाम (फिल्म )और घर का चिराग प्रमुख फ़िल्में हैं . 


अपने  फ़िल्मी सफ़र में उन्होंने विविध पात्रों को जिया  नब्बे के शुरुवाती दशक में वह राजनीती से जुड़ गए और दिल्ली से एम. एल. ए. चुने गए .इसके बाद फिल्मों में अभिनय करना बंद कर दिया . इस दौरान वह फिल्म खुदाई (१९९५) में नजर आये फिर इसके बाद एक अनिवासी भारतीय के किरदार में उनकी महत्वपूर्ण वापसी फिल्म 'आ अब लौट चले' से हुई  . सन २००२ में फिल्म 'क्या दिल ने कहा'  में प्रमुख भूमिका में नजर आये .किरदारों के सही चुनाव न कर पाने की वजह  से वफा ,दो दिलों के खेल में और दो-तीन फ़िल्में भी की जो किसी का ध्यान आकर्षित कर पाने में सफल नहीं रही. एक रोमांटिक अभिनेता के तौर पर उनकी फिल्मे अलग थी तो चरित्रों की विविधता की तुलना शायद ही कोई और अभिनेता राजेश खन्ना से कर सके युवा दिलों की धड़कन बन चुके राजेश खन्ना आज भी सुपरस्टार के सबसे बड़े अभिनेता के तौर पर जाना जाता है .