Life and Journey of Superstar

अभिनय और किरदार के स्टार - कमल हसन
      dasavatharam-ten-avatars-of-kamal-hassan-10.jpg  पिछले चार चार दशक के लंबे सिने कैरियर में कमल हसन ने कई सुपरहिट फिल्मों में अपने दमदार अभिनय से दर्शकों का दिल जीता. बहुमुखी प्रतिभा के धनि कमल हसन ने न केवल अभिनय कि प्रतिभा से बल्कि गायकी निर्माण, निर्देशक, पटकथा, लेखक, गीतकार, नृत्य, निर्देशन, पटकथा और गीत लेखन तथा नृत्य निर्देशक से भी सिने प्रेमियों को अपना दीवाना बनाया है. सुपर स्टार बनने तक के उनका सफ़र कभी आसन नहीं रहा.क्षेत्रीय फिल्मों के साथ ही हिंदी फिल्मों में भी अपने अनोखे विषय और प्रस्तुति उन्हें महानायक बना दिया. कमल हसन का जन्म 7 नवंबर 1954 को तमिलनाडु के परमकुडी में हुआ था. उनके पिता स्वतंत्रता सेनानी और जाने माने वकील थे. उनके पिता चाहते थे कि उनकी तीन बच्चों में कम से कम एक बच्चा अभिनेता बने. अपनी इस चाहत को पूरा करने के लिए उन्होंने कमल हसन को अभिनेता  बनाने का निश्चय किया. कमल हसन ने अपने सिने कैरियर कि शुरुआत बतौर बाल कलाकार 1960 में प्रदर्शित फिल्म कलाधुर कमन्ना से की. जाने - माने निर्देशक ए भीम सिंह के निर्देशन में बनी इस फिल्म में उन्होंने अपने दमदार अभिनय से न सिर्फ दर्शकों का दिल जीता, बल्कि वह राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किए गए. फिल्म कलाधुर कमन्ना की सफलता के बाद कमल हसन को थयइल्ला पिल्लई (1961), पारथल पसी थीरूम (1962), पथा कन्नीकई और वनामबडी (1963), जैसी फिल्मों में बतौर बाल कलाकार अभिनय करने का मौका मिला. इसके बाद उन्होंने लगभग नौ वर्षों  तक फिल्म इंडस्ट्री से किनारा कर लिया और अपना ध्यान पढाई की और लगाना शुरू कर दिया. सत्तर के दशक में अपने पिता के जोर देने पर उन्होंने अपनी पढाई छोड़ दी. और अपना ध्यान फिल्म इंडस्ट्री की और लगा दिया. इस बीच, अपने पिता के कहने पर उन्होंने नृत्य की भी शिक्षा हासिल की और कुछ फिल्मों में सहायक नृत्य निर्देशक के रूप में भी काम किया. वर्ष 1972 में कमल हसन की मुलाकात दक्षिण भारत के जाने माने निर्माता - निर्देशक के. बलाचंद्र से हुई. जिन्होंने उनकी प्रतिभा को पहचान कर अपनी फिल्म अरंगेतरम में काम करने का अवसर दिया. वर्ष 1973 में प्रदर्शित इस फिल्म में उन्होंने अभिनेत्री के भाई की भूमिका निभाई. अपनी छोटी सी भूमिका में भी उन्होंने अपने किरदार के साथ भरपूर न्याय किया और दर्शकों का दिल जीतने में सफल रहे. वर्ष 1973 में एक बार फिर कमल हसन को के.बालचंद्रन की फिल्म सोलाथान निनाईकरण में काम करने का अवसर मिला. लेकिन वर्ष 1975 में प्रदर्शित फिल्म अपूर्वा रंगनागल में मुख्य अभिनेता के रूप में निभाए गए किरदार से उन्हें पहचान मिली. फिल्म में उन्होंने एक ऐसी बागी युवक की भूमिका निभाई जो अपने से एक अधिक उम्र की महिला से प्यार करने लगता है. वर्ष 1977 में प्रदर्शित फिल्म 16 भयानिथानिले की व्यावसायिक सफलता के बाद कमल हसन स्टार कलाकार बन गए. इस फिल्म में उन्होंने एक ऐसे ग्रामीण युवक की भूमिका निभाई जो गांव के एक दबंग आदमी के चुंगल से एक युवती को आजाद कराता है और उसे मारकर जेल चला जाता है. फिल्म में दबंग युवक की भूमिका अभिनेता रजनीकांत ने निभाई जबकि युवती की भूमिका अभिनेत्री श्रीदेवी ने निभाई थी.

             वर्ष 1981 वह दौर था जब कमल हसन अपनी पहली हिंदी फिल्म से सुपर हित हो गए. निर्माता एल.वी. प्रसाद की फिल्म एक दूजे के लिए में अभिनय किया. फिल्म में उन्होंने एक ऐसे युवक की भूमिका निभाई जो दुसरे धर्म की लड़की से प्यार करने लगता है, जबकि दोनों के परिवार वाले इस रिश्ते के सख्त खिलाफ है. फिल्म में कमल हसन ने अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जित लिया. वर्ष 1982 कमल हसन की एक और सुपरहिट तमिल फिल्म मुंदरम पिरई रिलिज हुई, जिसके लिए वह अपने सिने कैरियर में पहली बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के राष्ट्रिय पुरस्कार से सम्मानित किए गए. बाद में वर्ष 1983 में सदमा शीर्षक से यह फिल्म हिंदी में रिलीज हुई जिसके कई दृश्य में कमल हसन ने एक ऐसे युवक कि भूमिका निभाई, जो एक युवती कि याददाश्त खो जाने के बाद उसे सहारा देता है और बाद में उससे प्यार करने लगता है, लेकिन बाद में जब युवती कि याददाश्त लौट कर आ जाती है तो वह उसे भूल जाती है और इस सदमें को कमल हसन सहन नहीं कर पाते हैं और पागल हो जाते हैं. हालांकि फिल्म टिकट खिड़की पर असफल हुई, लेकिन सिने दर्शक आज भी ऐसा मानते हैं कि कमल हसन के सिने कैरियर कि यह सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में से एक है.

         वर्ष 1985 में कमल हसन को रमेश सिप्पी के फिल्म सागर में ऋषि कपूर और डिंपल कपाडिया के साथ नजर आये. आरडी बर्मन के सुपरहिट संगीत और अच्छी स्टोरी के बावजूद फिल्म दर्शकों को पसंद नहीं आई लेकिन कमल हसन के अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा. इस फिल्म में अपने दमदार अभिनय के लिए कमल हसन को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किए गए और सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के लिए भी नामांकित किए गए. यह फिल्म इंडस्ट्री में पहला मौका था जब किसी अभिनेता को एक ही फिल्म के लिए दो नामांकन मिले. वर्ष 1985 में कमल हसन कि एक और सुपरहिट फिल्म गिरफ्तार प्रदर्शित हुई, जिसमें उन्हें सुपरस्टार अमिताभ बच्चन के साथ काम करने का मौका मिला. वर्ष 1987 कमल हसन के कैरियर का अहम वर्ष साबित हुआ. इस वर्ष उन्होंने एक मूक फिल्म पुष्पक में सशक्त अभिनय से दर्शकों को अचंभित कर दिया. उसी वर्ष कमल हसन को मणिरत्नम कि फिल्म नायकन में भी काम करने का मौका मिला. फिल्म में वेलु नायकन के किरदार को कमल हसन ने जीवंत कर अपना नाम भारत के महानतम अभिनेताओं में शुमार करा दिया. कमल हसन नायकन के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के राष्टीय पुरस्कार से भी नवाजे गए. बाद में इसी फिल्म में से प्रेरणा लेकर निर्माता- निर्देशक फिरोज खान ने फिल्म दयावान का निर्माण किया. जिसमें कमल हसन के किरदार को अभिनेता विनोद खन्ना ने निभाया. वर्ष 1990 में प्रदर्शित फिल्म अप्पू राजा में कमल हसन ने अपने दमदार अभिनय से दर्शकों का दिल जित लिया. इस फिल्म में यूं तो उन्होंने तीन अलग- अलग भूमिकाएं कि लेकिंम ऊँची कद काठी के रहते हुए भी उन्होंने जिस तरह तीन फुट के बौने के रूप में अपने आप को ढालकर दर्शकों को अचंभित कर दिया.

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    वर्ष 1996 में कमल हसन के सिने कैरियर कि एक और महत्वपूर्ण फिल्म इंडियन प्रदर्शित हुई. एस शंकर के निर्देशक में बनी फिल्म में उन्होंने दोहरे किरदार को रुपहले पर्दे पर साकार किया. फिल्म कि कहानी एक ऐसे वृध्द व्यक्ति पर आधारित है जो देश में फ़ैल रही असामाजिक व्यवस्था को समाज से उखाड़ फेंकना चाहता है और इसके लिए अपने पुत्र को जान से मारने से भी नहीं हिचकता. फिल्म में दमदार अभिनय के लिए कमल हसन अपने कैरियर में तीसरी बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के राष्ट्रिय पुरस्कार से सम्मानित किए गए. वर्ष 1998 में कमल हसन ने हिंदी फिल्मों में निर्देशन के क्षेत्र में भी कदम रख दिया और चाची 420 में अभिनय के साथ निर्देशन भी किया. दर्शकों के लिए सदा कुछ नया और चुनौतीपूर्ण किरदार निभाने वाले कमल हसन ने फिल्म में एक महिला का किरदार निभाकर दर्शकों का दिल जित लिया.

          कमल  हसन ने चार दशक लंबे सिने कैरियर में अब तक लगभग 200 फिल्मों में अपने अभिनय का जौहर दिखा चुके है. हिंदी फिल्मों के अलावा उन्होंने तमिल, तेलगू, मलयालम और कन्नड़ फिल्मों में भी कम किया. वर्ष 1981 में कमल हसन ने निर्माण के क्षेत्र में भी कदम रख दिया और राजा पारवई का निर्माण किया. इसके बाद उन्होंने अपूर्व सहोदरगल, थेवर मगन, चाची 420, हे राम और मुंबई एक्सप्रेस का भी निर्माण किया. कमल हसन ने कई फिल्मों कि कहानी भी लिखी है. इनमे विरासत और बीवी नंबर वन प्रमुख हैं. वर्ष 2008 में कमल हसन कि फिल्म दशावतारम प्रदर्शित हुई जिसमे दर्शकों को उनके अभिनय का नया रंग देखने को मिला. इस फिल्म में उन्होंने दस अलग-अलग भूमिकाएं निभाकर एक बार फिर साबित कर दिया कि वह हमेशा कुछ नया करते हैं और इसमें वह अपनी पूरी मेहनत और प्रतिभा का उपयोग करते हैं. आज भी कमल हसन के चाहने वाले उनकी फिल्म का इंतजार करते हैं क्योंकि उन्हें पता हैं कि भारतीय फिल्मों का यह जादूगर हर बार कुछ नया काम कर जाता हैं जिससे इतिहास बनता है.