Life and Journey of Superstar

भारतीय सिनेमा में 'एंग्री यंग मैन' के जनक अमिताभ बच्चन !
     Amitabh-Bachchan-Wallpapers.jpg.jpeg     अमिताभ जिसका अर्थ है, ऐसा प्रकाश जो कभी नहीं बुझेगा और अमिताभ बच्चन भारतीय सिनेमा के एक ऐसे ही सितारे है. इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश के हिन्दू कायस्थ परिवार में उनका जन्म हुआ उनके पिता डॉ. हरिवंश राय बच्चन प्रसिद्ध हिंदी कवी थे जबकि उनकी मां तेजी बच्चन कि थिएटर में गहरी रूचि थी और उन्हें फिल्म में भी रोल कि पेशकश कि गई थी किंतु उन्होंने गृहिणी बनना ही पसंद किया. अमिताभ का अभिनय के प्रति रुझान में इनका योगदान था क्योंकि वे हमेशा इस बात पर भी जोर देती थी कि उन्हें सेंटर स्टेज को अपना कैरियर बनाना चाहिए.

          अमिताभ, हरिवंश राय बच्चन के दो बेटो में सबसे बड़े हैं उनके दुसरे बेटे अजिताभ है. अमिताभ बच्चन ने मास्टर ऑफ़ आर्ट्स इलाहाबाद और बॉयज है स्कूल तथा उसके बाद नैनीताल के शेरवुड कॉलेज में पढाई की. उन्होंने इसके बाद अध्ययन करने के लिए दिल्ली विश्वविध्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज चले गए जहा उन्होंने विज्ञान स्नातक की उपाधि प्राप्त की और अभिनय में अपना कैरियर आजमाने के लिए कलकता की एक शिपिंग फर्म बर्ड एंड कंपनी में किराया ब्रोकर की नौकरी छोड़ दी. कैरियर की शुरुवात ख्वाजा  अहमद अब्बास के निर्देशन में बनी सात हिंदुस्तानी, के सात कलाकारों में एक कलाकार के रूप में की. उत्पल दत्त, मधु और जलाल आगा के साथ अभिनय किया. फिल्म सफल नहीं रही पर अमिताभ बच्चन ने अपनी पहली फिल्म के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार में नवांगतुक का पुरस्कार जीता. इसके बाद उनकी फ़िल्में रेशमा और शेरा भी दर्शकों  को पसंद नहीं आई. 1971 में आनंद फिल्म आई जिसमें उन्होंने उस समय के सुपरस्टार राजेश खन्ना के साथ काम किया. डॉ. भास्कर बनर्जी कि भूमिका करने वाले बच्चन ने कैंसर के कई रोगी का उपचार किया जिसका जीवन दर्शन इस डॉक्टर को बदल देता है. इसके बाद अमिताभ ने परवाना में एक मायूस प्रेमी की भूमिका निभाई जिसमें इसके साथ नवीन निश्चल, योगिता बाली और ओम प्रकाश थे और यह एक नकारात्मक किरदार था. 1972 में एस. रामनाथन की कॉमेडी फिल्म बॉम्बे टू गोवा में भूमिका निभाई. इन्होंने अरुणा ईरानी, महमूद, अनवर अली और नासिर हुसैन जैसे कलाकारों के साथ कार्य किया है.

         1973 में जब प्रकाश मेहरा ने इन्हें अपनी फिल्म जंजीर में इंस्पेक्टर विजय खन्ना के रूप में अवसर दिया जिसने अमिताभ बच्चन को एंग्री यंगमैन का खिताब दिया जो बॉलीवुड के एक्शन हीरो बन गए. बॉक्स ऑफिस पर सफलता पाने वाले एक जबरदस्त अभिनेता के रूप में यह उनकी पहली फिल्म थी, जिसने उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के रूप में यह उनकी पहली फिल्म थी, जिसने उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फिल्मफेयर पुरस्कार चुना गया.  1973 ही वह साल था जब अमिताभ बच्चन ने 3 जून को जया से विवाह किया और इसी समय ये दोनों जंजीर और अभिमान में एक साथ दिखाई दिए. बाद में ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन तथा बिरेश चटर्जी द्वारा लिखित नमक हराम फिल्म में विक्रम कि भूमिका निभाई.1975 अमिताभ बच्चन के लिए उपलब्धियों का वर्ष रहा. यश चोपड़ा द्वारा निर्देशित फिल्म दीवार में मुख्य कलाकार कि भूमिका कि जिसमें इनके साथ शशि कपूर, निरुप राय और नीतू सिंह थी और इस फिल्म में इन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार दिलवाया तो इसी साल प्रदर्शित हुई और भारत के सिनेमा में सबसे ज्यादा व्यावसायिक सफलता का कीर्तिमान स्थापित किया.

          अब तक एक आक्रामक युवा नायक कि भूमिकाओं में सफल होने के बाद भी उन्होंने कभी कभी, अमर अकबर एन्थनी में रोमांटिक और हास्य भूमिकाएं करके साबित किया कि दूसरी भूमिकाओं में भी उतने ही सफल हैं. यश चोपड़ा कि फिल्म कभी कभी में अमिताभ बच्चन ने एक अमित मल्होत्रा के नाम वाले युवा कवी कि भूमिका निभाई जिसे राखी गुलजार द्वारा निभाई गई पूजा नामक एक युवा लड़की से प्रेम हो जाता है. 1978 में उस समय कि सबसे अधिक आय अर्जित करने वाली चार फिल्मों में कस्में वादे, त्रिशूल, मुकद्दर का सिकंदर और मि. नटवरलाल नामक ने अमिताभ बच्चन को सुपरस्टार बना दिया. फिल्म में उनके प्रदर्शन के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला. 

          उसके बाद अस्सी के दशक के आस-पास राज खोसला निर्देशित फिल्म दोस्ताना, यश चोपड़ा की कला पत्थर, सिलसिला में काम किया. इसी समय आई दूसरी फिल्मों में राम बलराम, शान, लावारिस और शक्ति जैसी फ़िल्में भी अमिताभ बच्चन के कैरियर में महत्वपूर्ण रही. निर्देशक मनमोहन देसी ने कुली फिल्म में बच्चन की दुर्घटना के बाद फिल्म की कहानी का अंत बदल दिया था. इस फिल्म में बच्चन के चरित्र को वास्तव में मृत्यु प्राप्त होनी थी लेकिन बाद में स्क्रिप्ट में परिवर्तन करने के बाद उसे अंत में जीवित दिखाया गया. देसाई ने इनके बारे में कहा था की ऐसे आदमी के लिए यह कहना बिलकुल अनुपयुक्त होगा की जो असली जीवन में मौत से लड़कर जीता हो उसे परदे पर मौत अपने आगोश में सामान जाए. 1984 में अमिताभ ने अभिनय से कुछ समय के लिए विश्राम ले लिया और अपने पुराने मित्र राजीव गांधी के सहयोग से राजनीती में कूद पड़े. हालांकि उनका राजनैतिक कैरियर कुछ अवधि के लिए ही था, जिसके तीन साल बाद इन्होंने अपनी राजनैतिक अवधि को पूरा किए बिना छोड़ दिया.

         इस दौरान अमिताभ बच्चन निर्माता बने और अमिताभ बच्चन कार्पोरेशन लिमिटेड की स्थापना की. 1996 में पहली फिल्म तेरे मेरे सपने थी जो बॉक्स ऑफिस पर विफल रही. एबीसीएल ने कुछ फ़िल्में बनाई लेकिन इनमें से कोई भी फिल्म कमाल नहीं दिखा सकी.

         इसके बाद उन्होंने अभिनय के कैरियर को संवारने का प्रयास किया जिसमे बड़े मियां और सूर्यवंशम से औसत सफलता मिली तो लाल बादशाह और हिंदुस्तान की कसम बॉक्स ऑफिस पर विफल रही है. यह एक ऐसा दौर ख़त्म हो गया और लगा की परदे पर उनका चमत्कार समाप्त हो गया है.

    वर्ष 2000 में कौन बनेगा करोडपति के जरिए टेलीविजन पर इतिहास रच दिया. जो अभी तक जरी है. इस शो को तकिया कलाम कम्प्यूटर जी लौक किया जाए बहुत ही प्रसिद्द हुआ और इसी के साथ बॉलीवुड के बड़े सितारे को छोटे परदे पर आने का सिलसिला शुरू हो गया. फिर अमिताभ बच्चन फिल्म मोहब्बतें में एक आदर्शवादी अध्यापक का किरदार निभाकर परदे पर वापसी की. इसके बाद उन्होंने अपने उम्र के अनुसार चरित्र निभाने लगे. कभी ख़ुशी कभी गम और बागबान, अक्स, आंखें, खाकी, देव, ब्लेक, बंटी और बबली, सरकार, कभी अलविदा न कहना फिल्मों में भूमिका की.

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        अभिनय के इस दशक में ब्लैक और चीनी कम के किरदार प्रयोगधर्मी रहे और पसंद भी किया गया. फिल्म सरकार में सुभाष नागरे का किरदार भी दर्शकों को बहुत पसंद आया. हालांकि उनकी कई फिल्म जैसे आग, निःशब्द असफल रहीं. दो वर्ष पहले चीनी कम में एक अधेड़ प्रेमी की भूमिका बहुत प्रशंसनीय रही. हालांकि प्रदर्शित उनकी प्रयोगधर्मी फिल्म 'पा' को दर्शकों ने बहुत सराहा. फिल्म में एक विशेष बीमारी से पीड़ित तेरह वर्ष के बच्चे का अभिनय करने के लिए उस वर्ष के तक़रीबन सभी सर्वश्रेष्ठ अभिनय अवार्ड उनके नाम रहे.

         अपने जीवन में कठिन संघर्ष के साथ उन्होंने सफलता के इस मुकाम को हासिल किया है. किसी ने कहा है की सफलता एक सफ़र है न कि कोई मंजिल. शायद इसलिए आज भी अमिताभ बच्चन इस सफलता को सफ़र मानकर अग्रसर है.