Life and Journey of Superstar

सौन्दर्य , अभिनय , नृत्या और ग्लैमर की स्वप्नसुंदरी हेमा मालिनी

      38556-hema-malini-looking-gorgeous.jpg                  अभिनेत्री और नृत्यांगना हेमा मालिनी बालीवुड की एक ऐसी  अभिनेत्री हैं, जिनमें सौंदर्य और अभिनय का  अदभूत संगम देखने को मिलता है फिल्म सपनो का सौदागर से हिन्दी फ़िल्मो मे दस्तक देनेवाली  अभिनेत्री हेमा मालिनी ने अपनी पहली फिल्म्स ही यह साबित कर दिया की वह ड्रीम गेल है . फ़िल्मो उध्योग मे पिछले ४०  वर्ष मे १५०  फ़िल्मो के सफ़र मे हेमा मालिनी ने लोकप्रिय और कलात्मक दोनो ही तरह के किरदार को  निभाया.  हेमा मालिनी का जन्म १६  अक्तूबर १९४८  अम्मंगुडी, तमिल नाडु मे हुआ था . इनके पिता का नाम वी एस आर चक्रवर्ती  और माँ  जया चक्रवर्ती थी जो एक फिल्म निर्माती थी .  हेमा मालिनी की प्रंभिक शिक्षा चेन्नई  मे हुई और अपने कैरियर की शुरुवार मे ही उन्होने  एक  १९६१  मे  तेलगु फिल्म पांडव वनवासन मे नर्तकी का किरदार निभाया. यह जानकार कोई भी आश्चर्या मे पड़  सकता है की दर्शको के दिलो पर राज करने वाली हेमा मालिनी ने जब १९६४  मे फ़िल्मो मे प्रवेश करना चाहा तो उन्हे तमिल फ़िल्मो के निर्देशक श्रीधर  ने यह कहकर रोल देने से माना कर दिया की उनमे (हेमा मालिनी ) मे  सितारो जैसी (स्टार अपील ) कोई बात नही है .  बाद में सत्तर के दशक में निर्माता-निर्देशक श्रीधर ने ही  ने उनकी लोकप्रियता को भुनाने के लिए उन्हें लेकर १९७३  में (गहरी चाल) फिल्म का निर्माण किया।  तमिल फिल्मो में अवसर न मिलने पर  हेमा मालिनी ने बॉलीवुड यानी की हिन्दी फ़िल्मो मे अपने करियर को आज़माने आ पहुची .हेमा मालिनी फिल्म इंडस्ट्री में जगह बनाने के लिए १९६८  तक संघर्ष करती रहीं लेकिन उन्हें काम नहीं मिला। सन १९६८  मे  फिल्म सपनो के सौदागर के ज़रिए उन्होने अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज करायी इस फिल्म मे उनके साथ सूपरस्टार राज कपूर थे  फिल्म के प्रचार के दौरान हेमा मालिनी को.ड्रीम गर्ल. के रूप में प्रचारित किया गया।  फिल्म दर्शको को बहुत पसंद नहीं आई . दो  वर्ष के अंतराल के बाद १९७०  मे देव आनंद के साथ आई फिल्म जानी मेरा नाम के साथ हेमा मालिनी शीर्ष अभिनेत्री बन गयी . तार और अस्सी के दशक की कई फ़िल्मो के हेमा मालनी अपने अभिनय,  नृत्या, सौंदर्य, और ग्लेंैर  का जलवा देखने को मिलता है .

 

 हेमा मालिनी को प्रारंभिक सफलता दिलाने में निर्माता.निर्देशक रमेश सिप्पी की फिल्मों का बड़ा योगदान रहा। हेमा मालिनी को रमेश शिप्पी कि  फिल्म(अंदाज)1971 से  नयी पहचान मिली । इसे महज एक संयोग कहा सकते हैकि  कि निर्देशक के रूप में रमेश सिप्पी की यह पहली फिल्म थी। इस फिल्म में हेमा मालिनी ने राजेश खन्ना की प्रेमिका  की भूमिका निभाई जो उनकी मौत के बाद नितांत अकेली हो जाती है। अपने इस किरदार को हेमा मालिनी ने इतनी संजीदगी से निभाया कि  आज भी दर्शक उस भूमिका को भूल नही पाए हैं। वर्ष 1972 में हेमा मालिनी को रमेश सिप्पी की ही फिल्म (सीता और गीता) में काम करने का अवसर मिला जो उनके सिने कैरियर के लिए मील का पत्थर साबित हुई। उनके फिल्म में डबल रोल की बहुत चर्चा हुई और हेमा मालिनी  इस फिल्म की सफलता के बाद  शोहरत की बुंलदियों पर जा पहुंचीं। उन्हें इस फिल्म में दमदार अभिनय केलिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्म फेयर पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। रमेश सिप्पी निर्देशित फिल्म सीता और गीता में जुडवा बहनों की कहानी थी जिनमें एक बहन ग्रामीण परिवेश में पली. बढ़ी है और डरी सहमी रहती है जबकि दूसरी तेज तर्रार युवती होती है। बाद में इसी से प्रेरित होकर फिल्म चालबाज .का निर्माण किया गया जिसमें दोहरी भूमिका वाली बहनों का किरदार श्रीदेवी ने निभाया।हेमा मालिनी सीता और गीता से फिल्म इंडस्ट्री में शोहरत की बुलंदियों पर पहुंची लेकिन दिलचस्प बात यह है कि फिल्म के निर्माण के समय निर्देशक रमेश सिप्पी नायिका की भूमिका के लिए मुमताज का चयन करना चाहते थे लेकिन किसी कारण से वह यह फिल्म नहीं कर सकी। बाद में हेमा मालिनी को इस फिल्म में काम करने का अवसर मिला।वर्ष १९७५  में प्रदर्शित फिल्म (शोले) में धर्मेन्द्र ने वीरु और हेमामालिनी ने बसंती की भूमिका में दर्शकों का भरपूर मनोंरजन किया।  इस फिल्म में अपने अल्हड. अंदाज से हेमा मालिनी ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। फिल्म में हेमा मालिनी के संवाद उन दिनों दर्शकों की जुबान पर चढ. गए शोले के साथ ही वर्ष 1975 हेमा मालिनी के सिने कैरियर का अहम पड़ाव साबित हुआ। उस वर्ष उनकी संन्यासी धर्मात्मा खूशबू और प्रतिग्या जैसी सुपरहिट फिल्में प्रदर्शित हुई।  उसी वर्ष हेमा मालिनी को अपने प्रिय निर्देशक रमेश सिप्पी की फिल्म (शोले) में काम करने का मौका मिला। सत्तर के दशक में हेमा मालिनी ने ग्लैमर किरदार के साथ ही खुशबू 1975 किनारा 1977 और मीरा 1979 जैसी फिल्मों में संजीदा किरदार निभाकर अपने आलोचकों का मुंह हमेशा के लिए बंद कर दिया जो उन्हें सिर्फ खुबसूरत गुडिया समझते  थे ।इस दौरान हेमा मालिनी के सौंदर्य और अभिनयका जलवा छाया हुआ था। इसी को देखते हुए निर्माता प्रमोद चक्रवर्ती ने उन्हें लेकर फिल्म .ड्रीम गर्ल .का निर्माण तक कर दिया। 


परदे पर हेमा मालिनी की जोडी धर्मेन्द्र के साथ खूब जमी। धर्मेद्र-हेमा की पहली मुलाकात ख्वाजा अहमद अब्बास की फिल्म आसमान महल के प्रीमियर पर हुई थी। हेमा तब एकदम नई थीं। बस एक फिल्म सपनों का सौदागर रिलीज होकर फ्लॉप हो चुकी थी, लेकिन धर्मेद्र के नाम के साथ कई सफल फिल्में जुड़ी हुई थीं यह फिल्मी जोंडी सबसे पहले फिल्म (शराफत )से चर्चा में आई। जब हेमा को धर्मेद्र के साथ शराफत और तुम हंसी मैं जवां में काम करने का अवसर मिला, तब तक धर्मेद्र पचास फिल्मों का सफर तय कर चुके थे। इन दोनों फिल्मों में एक गंभीर थी और एक कॉमेडी। इनकी शूटिंग के दौरान हेमा-धर्मेद्र एक-दूसरे के काफी निकट आए धर्मेद्र-हेमा की साथ वाली दोनों फिल्में हिट हो गई और जोड़ी चल निकली। दोनों को साथ-साथ फिल्में मिलने लगीं शोले के बाद  हेमा और धमेन्द्र की  जोड़ी ने ड्रीम गर्ल चरस आसपास प्रतिज्ञा  राजा जानी , रजिया सुल्तान,  अली बाबा चालीस चोर,  बगावत,  आतंक,  द बर्निंग ट्रेन,  चरस , दोस्त आदि फिल्मों में एक साथ काम किया।। शूटिंग के दौरान दोस्ती ने प्यार का रूप ले लिया हेम़ा मालिनी और धर्मेन्द्र के रिश्ते के प्रति उनका परिवार तैयार न था पर  हेमा  अपने  घरवालो   के विरुद्ध  भी  धर्मेन्द्र  को  छोडने  को  तैयार न थी   यहाँ  तक   की   धर्मेद्र की यह शर्त भी मान ली कि शादी करने के लिए वे न तो पत्नी प्रकाश को छोड़ेंगे और न बच्चे और परिवार को। प्रेम दीवानी हेमा ने यह शर्त भी मान ली। उनका मानना था, प्यार केवल एक बार होता है और प्यार में प्रेयसी और प्रेमी एक-दूसरे को उनकी कमियों के साथ अपनाते हैं। हेमा ने ऐसा ही कर दिखाया। फिल्म दिल का हीरा की शूटिंग के दौरान उन्होंने अपने दिल के हीरे को हमेशा-हमेशा के लिए अपना लेने का फैसला किया।  २  मई  १९८० आखिर में वह दिन भी आ गया जब ड्रीम गर्ल ने धर्मेन्द्र   के गले में वरमाला डाल दी


सत्तर और अस्सी के दशक की कई फ़िल्मो के हेमा मालनी अपने अभिनय,  नृत्या, सौंदर्य, और ग्लेंैर  का जलवा देखने को मिलता है . इस दौरान कई ऐसी फ़िल्मे भी रही जिसमे हेमा मालिनी अपने ख़ास अंदाज के लिए आज भी याद की जाती है इनमे त्रिशूल, जोशीला, लाल पत्थर, मीयर्रा, खुश्बू और  किनारा जैसी फ़िल्मो के किरदार प्रमुख है.


नब्बे के दशक मे हेमा मालिनी ने निर्देशन की तरफ झुकाव महसूस किया और वर्ष १९९२  में फिल्म अभिनेता शाहरूख खान को लेकर उन्होंने फिल्म (दिल आशना है) का निर्माण और निर्देशन किया।वर्ष १९९५  में उन्होंने छोटे पर्दे के लिए .मोहिनी .का निर्माण और निर्देशन किया। . इसके साथ ही हेमा मालिनी ने बतौर निर्मत्र टेलीविज़न से भी जुड़ी और वर्ष १९९०  में धारावाहिक नुपूर का निर्देशन भी किया.


अस्सी के दशक के बाद  एक अंतराल तक हेमा मालिनी  फ़िल्मो  मे  नज़र नही आई .उन्होने एक बार फिर  सन २०००  मे फिल्म बागबाँ के ज़रिए उन्होने अमिताभ बच्चन के साथ एक यादगार भूमिका निभाई . इसी दौरान यश चोपड़ा की माहतकंशी फिल्म वीर  ज़ारा मे भी अमिताभ बच्चन के साथ अतिथि भूमिका मे नज़र आई. 


हेमा मालिनी की दिलचस्पी धर्मेन्द्र  की तहत ही राजनीति मे बढ़ गयी और २००४  मे भारतीय जनता पार्टी को आधिकारिक तौर से जुड़ गयी . उन्हे राज्य सभा का सदस्य भी चुना गया . अपने व्यस्त कामकाज के बाद भी वह राजनीति मे सक्रिय भूमिका निभाती है हेमा मालिनी को फिल्मों में उल्लेखनीय योगदान के लिए १९९९  में फिल्मफेयर का लाइफटाइम एचीश्री सम्मान से भी सम्मानित की गईं . 


हेम़ा मालिनी आज भी सिनेमा और राजनीती में सक्रीय है हेम़ा मालिनी भारत नाट्यम की कुशल नृत्यांगना है और अपनी दोनों बेटी ईशा और आहना के साथ कई मंच पर प्रस्तुति देती रहती है   बतौर एक सफल महिला उद्यमी उन्होंने कई मासिक पत्रिकाओ का प्रकाशन भी कर्र रही है  अपनी बड़ी बेटी ईशा देओल के लिए फिल्म टेल मी ओ खुदा का निर्माण और निर्देशन कर रही है