Life and Journey of Superstar

स्वर की सरस्वती लता मंगेशकर
           lata.jpgभारत कोकिला, बुलबुले हिंद, स्वर सामग्री, प्यासी कोयल और भी न जाने कितने विशेषण नाम है, फिर भी उनके स्वर की तुलना शब्दों से अधूरी रह जाती है. टाईम पत्रिका ने उन्हें भारतीय पार्श्वगायन की अपरिहार्य और एकछत्र साम्म्  स्वीकार किया है तो 1974 से दुनिया में सबसे अधिक गीत गाने का गिनीज बुक रिकॉर्ड में उनके नाम है. दुनिया में लता मंगेशकर एक जीवित हस्ती है जिनके नाम से बड़ा अवार्ड दिया जाता है. लता मंगेशकर का जन्म 28 सितंबर 1929 को इंदोर में हुआ था. पिता दिनानाथ मंगेशकर शास्त्रीय गायक थे. लता दीदी का जन्म मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में सबसे बड़ी बेटी के रूप में पंडित दिनानाथ मंगेशकर के मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ. उनके पिता रंगमंच के कलाकार और गायक थे. मंगेशकर परिवार से हृदयनाथ मंगेशकर और बहने उषा मंगेशकर, मीना मंगेशकर और आशा भोसले सभी ने संगीत को अपने जीवन में एक साधना की तरह अपनाया. हालांकि लता का जन्म इंदौर में हुआ था लेकिन परवरिश महाराष्ट्र में हुई. जब लता सात साल की थी तब वो महाराष्ट्र आई. लता ने पांच साल की उम्र से पिता के साथ एक रंगमंच कलाकार के रूप में अभिनय करना शुरू कर दिया था.


             पिछले छः दशकों से उनके स्वर से फिल्म के गीत के साथ भजन और क्षेत्रीय गीतों से संगीत गीत के एक स्वर्णयुग का निर्माण किया है. हालांकि लता जी ने लगभग तीस से ज्यादा भाषाओं में फ़िल्मी और गैर- फ़िल्मी गाने गाये हैं. लेकिन उनकी पहचान भारतीय सिनेमा में एक पार्श्वगायक के रूप में रही है.


             लता बचपन से ही गायक बनना चाहती थी. बचपन में कुंदनलाल सहगल की एक फिल्म चंडीदास देखकर उन्होंने कहा था कि वो बड़ी होकर सहगल से शादी करेगी. पहली बार लता ने वसंत जोगलेकर द्वारा निर्देशित एक फिल्म कीर्ति हसाल के लिए गया. उनके पिता नहीं चाहते थे कि लता फिल्मों के लिए गाये, इसलिए इस गाने को फिल्म से निकाल दिया गया. लेकिन उसकी प्रतिभा से वसंत जोगलेकर काफी प्रभावित हुए. पिता की मृत्यु के बाद (जब लता सिर्फ 13 साल की थी), लता को पैसों की बहुत किल्लत झेलनी पड़ी और काफी संघर्ष करना पड़ा. उन्हें अभिनय बहुत नहीं था लेकिन पिता की असामयिक मृत्यु की वजह से पैसों के लिए उन्हें कुछ हिंदी और मराठी फिल्मों में काम करना पड़ा.


             अभिनेत्री के रूप में उनकी पहली फिल्म 'पहिली मंगलागौर' (1942), रही, जिसमें उन्होंने स्नेहप्रभा प्रधान की छोटी बहन की भूमिका निभाई. बाद में उन्होंने कई फिल्मों में अभिनय किया जिनमें, माझे बाळ, चिमुकला संसार (1943), गजभाऊ (1944), बड़ी मां (1945), जीवन यात्रा (1946), मांद (1948), छत्रपति शिवाजी (1952) शामिल थी. बड़ी मां, में लता ने नूरजहां के साथ अभिनय किया. 1945 में उस्ताद गुलाम हैदर (जिन्होंने पहले नूरजहां की खोज की थी) अपनी आनेवाली फिल्म के लिए लता को एक निर्माता के स्टूडियो ले गये जिसमें कामिनी कौशल मुख्य भूमिका निभा रही थी. वे चाहते थे कि लता उस फिल्म के लिए पार्श्वगायन करें. लेकिन गुलाम हैदर को निराशा हाथ लगी. 1947 में वसंत जोगलेकर ने अपनी फिल्म 'आपकी सेवा' में लता को गाने का मौका दिया. इस फिल्म के गानों से लता की खूब चर्चा हुई. इसके बाद लता ने 'मजबूर' फिल्म के गानों 'अंग्रेजी छोरा चला गया' और 'दिल मेरा तोडा हाय मुझे कहीं का न छोड़ा तेरे प्यार ने' जैसे गानों से अपनी स्थिति सुदृढ़ की.


                हालांकि इसके बावजूद लता को उस खास हित की अभी भी तलाश थी. 1949 में लता को ऐसा मौका फिल्म 'महल' के 'आयेगा आनेवाला' गीत से मिला. इस गीत को उस समय की सबसे खुबसूरत और चर्चित अभिनेत्री मधुबाला पर फिल्माया गया था. इसके बाद लता ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.


              lata3.jpg   उनके गानों को समयकाल में बांधना या सर्वश्रेष्ठ गीतों को चुनना असंभव है. फिर भी उनके गीत जैसे- 'फैली हुई है ये सपनों की बांहें' (हाउस नं. 44), 'ठंडी हवाएं' (नौ जवान), 'अब तो है तुमसे' (अभिमान), 'कांटों से खिंच के ये आंचल' (गाइड), 'दिल जले तो जले' (टेक्सी ड्राइवर), 'ये दिल और उनकी निगाहों के साये' (प्रेम पर्वत), 'अल्ला तेरो नाम' (हम दोनों), 'ए मेरे वतन के लोगों', 'धीरे से आजा रे अखियन में (अलबेला), 'माई रे मैं कासे कहूं (दस्तक), 'आएगा आनेवाला' (महल), 'हवा में उड़ता जाए' (बरसात), 'ठाडे रहियो' (पाकीजा), 'बांहों में चले आओ' (अनामिका), 'दिखाई दिए यूं' (बाजार) आज भी सुने जाते हैं. इन गानों में तक़रीबन सभी संगीतकार हैं जिन्होंने लताजी के साथ काम किया. 90 के दशक के बाद भी उनके स्वर में वाही मधुरता है जैसे - 'हम आपके हैं कौन', 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे', 'दुश्मन' या फिर 'वीर जारा'. आज के अभिनेत्रियों पर भी उनकी आवाज उतना ही जंचती है.


              कभी   'ए मेरे वतन के लोगों' जैसा गाना गाकर पुरे देश की आंखे नाम कर देने वाली लता मंगेशकर इस दौर में भी 'लुक्का छिपी बहुत हुई, सामने आ जा राम' जैसे गानों से झकझोर भी देती हैं और मुग्ध भी कर देती हैं. भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के साथ उम्रदराज हुई लता कहती हैं, "मैं हर तरह के गाने गा सकती हूं, लेकिन मुझे मीठे प्यार भरे गीत पसंद है."  एक बार फिर लता मंगेशकर तीन साल बाद फिर बॉलीवुड फिल्म में अपने सुरों का जादू बिखेर दिया जो अब तक कायम है. 


          लता  की जादुई आवाज के भारतीय उपमहाव्दीपके साथ-साथ पूरी दुनिया में दीवाने हैं.