Life and Journey of Superstar

हिंदी फिल्मों के किंग ऑफ़ रोमांस यश चोपड़ा !
                   yash chopda.jpg 80 की उम्र के निर्देशक के साथ काम करने की बात सुन कर कई अभिनेता और अभिनेत्री अपना मोबाइल बंद करना पसंद कर सकते हैं परंतु एक नाम ऐसा था, जिसके साथ पलके बिछाए उनके साथ काम करने का लोग इंतजार करते थे कि शायद इस बार उन्हें बुलवा आ जाए पर ये बुलावा सबके नसीब में नहीं होता है. हम बात कर रहे हैं यश चोपड़ा कि जिन्होंने  50 साल से अपने निर्देशन से फिल्म जगत में एक अलग छाप छोड़ी है . इस दीवाली में  80 साल की उम्र में भी वह एक फिल्म निर्देशित कर रहे हैं जिसके नायक - नायिका भी आज के सबसे महंगे और कामयाब स्टार है . एक तहफ किंग मेकर शाहरुख़ खान है तो उनके साथ कटरीना कैफ और अनुष्का शर्मा का रोमांस देखने के लिए प्रशंसक इंतजार कर रहे हैं तो बतौर एक सफल फिल्म निर्माता उनकी कंपनी यशराज अकेले ऐसी कंपनी है जो बॉलीवुड के टॉप खांस आमिर खान, शाहरुख़ खान और सलमान खान के साथ एक समय पर फिल्म निर्माण कर रही है .


                         यश चोपड़ा का जन्म 27 सितंबर, 1932 को लाहौर में हुआ था जो अब पाकिस्तान का हिस्सा है. आजादी के बाद वह भारत आ गए. उनके बड़े भाई बी. आर. चोपड़ा बॉलीवुड के जाने माने  निर्माता निर्देशक थे . बड़े भाई की प्रेरणा पर ही उन्होंने भी फिल्मों में अपना कैरियर बनाने के बारे में सोचा तो बी. आर. चोपड़ा के सहायक के रूप में फिल्म निर्माण की बारीकियों को समझने लगे. उन्हें स्वतंत्र निर्देशक के रूप में शुरुआत में फिल्म 'धुल का फूल' जिसमें जोड़ी थी राजेंद्र कुमार और माला सिन्हा की साथ में नंदा और अशोक कुमार भी थे. यश चोपड़ा ने शुरू से ही स्थापित कलाकारों के साथ ही काम किया. यह फिल्म बेहद सफल साबित हुई साथ में यश चोपड़ा ने रोमांटिक फिल्मों के निर्देशक के रूप में अपनी छाप छोड़ी. इसके बाद उन्होंने भाई के ही बैनर तले 'धर्म पुत्र ' को भी निर्देशित किया . आचार्य बिनोवा भावे के नॉवेल पर बनी इस फिल्म ने ना सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर अपना झंडा गाड़ा बल्कि उसे नेशनल अवार्ड भी मिला. वर्ष 1965 में आई फिल्म  'वक्त' यश चोपड़ा की पहली हिट फिल्म साबित हुई. वक्त एक मल्टी स्टारर फिल्म थी जिसमें उस दौर के सभी बेहतरीन सितारे थे. सुनील दत्त, राज कुमार, शशी कपूर, साधना, शर्मिला टैगोर, शशिकला और बलराज साहनी जैसे सितारों ने इस फिल्म में चार चांद लगा दिए. इस फिल्म के गाने 'ए मेरी जोहरा जबी ' आज तक लोगों की जुबान पर है. इसके संवाद भी लोगों में आज तक तरो ताजा बने हुए हैं. फिल्म 'इत्तेफाक' उनकी उन चुनिंदा फिल्मों में से हैं जिसमें उन्होंने कॉमेडी और रोमांस के अलावा थ्रिलर पर भी काम किया था. इस फिल्म में जोड़ी राजेश और नंदा की थी यह एक प्रेम त्रिकोण तो नहीं पर एक रात में आदमी और एक औरत की कहानी ने लोगों के बीच यह धारणा रखी की यश चोपड़ा हर तरह की फिल्में निर्देशित कर सकते हैं, 

                             निर्देशन के साथ ही 1973 में उन्होंने फिल्म निर्माण में कदम रखा और यश राज बैनर की स्थापना की. राजेश खन्ना, शर्मिला टैगोर और राखी अभिनीत यह फिल्म टिकट खिड़की पर सुपरहिट साबित हुई. इसके साथ ही वह निर्माता के रूप में भी फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित हो गए. इस फिल्म की सफलता ने उन्हें बॉलीवुड में नया नाम और एक नई पहचान दिया. इसके बाद 1975 प्रदर्शित फिल्म 'दीवार' जिसमें अमिताभ बच्चन ने अभिनय किया था. इस फिल्म की सफलता ने यश चोपड़ा को कामयाब निर्देशकों की श्रेणी में ला खड़ा किया. जहां उनकी फिल्मों में काम करने के लिए अभिनेता उनके घर के चक्कर लगाने लगे. हालांकि इस फिल्म के साथ उनके अमिताभ बच्चन के साथ संबंध काफी मधुर हो गए और साथ ही ' सिलसिला' , ' कभी कभी ' जैसी फिल्मों में अमिताभ के साथ ही काम किया.

                             अमिताभ बच्चन और शशि कपूर अभिनीत इस फिल्म में उन्होंने दो भाईयों के बीच आपसी संघर्स को रुपहले पर्दे पर दिखाया था. वर्ष 1976 में यश चोपड़ा की फिल्म 'कभी कभी ' प्रदर्शित हुई. रूमानी पृष्टभूमि पर बनी इस फिल्म में उन्होंने एंग्री यंग मैंने अमिताभ बच्चन को रूमानी भूमिका में पेश करके दर्शको को आश्चर्यचकित कर दिया. माना जाता है की वर्ष 1978 में प्रदर्शित फिल्म 'त्रिशूल' यश चोपड़ा की एक और सुपरहिट फिल्म साबित हुई. इस फिल्म से ही पूनम ढिल्लों ने अपने कैरियर की शुरुआत की थी . वर्ष 1981 में प्रदर्शित फिल्म ' सिलसिला' यश चोपड़ा निर्देशित महत्वपूर्ण फिल्मों में शुमार किया जाता है. माना जाता है की इस फिल्म में अमिताभ और रेखा के जीवन को रुपहले पर्दे पर दर्शाया गया है. 

                               वर्ष  1982 से 1989 तक का वक्त यश चोपड़ा के सिने कैरियर के लिए बहुत बुरा साबित हुआ. इस दौरान उनकी 'नाखुदा', 'सवाल', 'फासले', 'मशाल' और 'विजय' जैसी कई फ़िल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल हो गई लेकिन एक बार फिर 1989 में श्रीदेवी और ऋषि कपूर अभिनित फिल्म 'चांदनी' की कामयाबी के साथ वह एक बार फिर से शोहरत की बुलंदियों पर जा पहुंचे. 

                                वर्ष 1991 में प्रदर्शित फिल्म 'लम्हे' यश चोपड़ा की एक खास महत्वकांक्षी फिल्म थी .जिसमे यह दिखने का प्रयास किया की प्यार कोई उम्र नहीहोती हैं. काफी कठिन विषय और किरदारों के साथ यह फिल्म आज हिंदी फिल्मों में एक जगह रखती है . वर्ष 1995 में चोपड़ा की एक और सुपरहिट फिल्म 'दिलवाले दुल्हनियां ले जाएंगे' युवा प्रेम कथा पर बनी फिल्म थी. काजोल और शाहरुख़ खान के बेहतरीन अभिनय से सजी यह फिल्म सुपरहिट हुई. इसके बाद 1997 में उन्होंने फिल्म 'दिल तो पागल है' का निर्देशन किया. कुछ सालों तक वह निर्देशन से दूर रहे और फिर लौटे 2004 की सुपरहिट फिल्म ' वीर जारा' को लेकर. इस फिल्म का निर्देशन यश चोपड़ा ने किया. फिल्म में प्यार की परिभाषा की ऐसी व्याख्या की गई की यश चोपड़ा को लोगों ने सही अर्थो में किंग ऑफ रोमांस कहना शुरू कर दिया.

                                   फिल्म  निर्देशक के साथ ही एक कुशल निर्माता के तौर पर उनकी सोच हमेशा बदलते हुए सिनेमा और बाजार के साथ संतुलित नजर आई. देश में मल्टीप्लेक्स के आगमन के साथ ही उन्होंने अपने फिल्म निर्माण कंपनी यशराज फिल्म के हर साल तीन फिल्मों का निर्माण शुरू कर दिया. नए निर्देशक कार और  अभिनेताओं को भी अवसर देकर प्रतिभा को एक प्लेटफार्म देते रहे हैं तो उनकी नयी कंपनी वाई फिल्म्स के जरिये छोटे बजट की फिल्मों का निर्माण भी हो रहा है. साथ ही आज यशराज फिल्म्स हॉलीवुड में भी अपने पैर पसार लिये हैं.

                                    यश चोपड़ा को अब तक 11 बार फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. उन्हें 1964 में प्रदर्शित फिल्म 'वक्त' के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के लिए फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इसके बाद वह 1969 में फिल्म 'इत्तेफाक' सर्वश्रेष्ठ निर्देशक, 1973 में 'दाग' सर्वश्रेष्ठ निर्देशक, 1975  में 'दीवार'  सर्वश्रेष्ठ निर्देशक, 1991 में 'लम्हे' सर्वश्रेष्ठ निर्माता 1995 में 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे'  सर्वश्रेष्ठ निर्माता, 2003 में वह फिल्म के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योहदान को देखते हुए 2001 में वह फिल्म जगह के सर्वोच्च सम्मान 'दादा साहब फालके' पुरस्कार से भी सम्मानित किए गए. 2005 में उन्हें भारत सरकार द्वारा 'पद्म भूषण ' दिया गया था.

                                      रोमांस  के किंग यश चोपड़ा की आने वाली फिल्म एक बार फिर प्यार के नए रंग दर्शकों को दिखाएंगी यह उम्मीद करना जरा भी गलत नही होगा.