Life and Journey of Superstar

साधारण अभिनेत्री का असाधारण सफ़र- जरीना वहाब
calendar-stills03.jpg                            जरीना वहाब फ़िल्मी दुनिया का वो चेहरा हैं जिन्हें अपनी अदभुत अभिनय क्षमता और गंभीर अभिनय के लिए जाना जाता हैं. दक्षिण भारत से शुरू से ही अभिनेत्रियां हिंदी फिल्म जगत की ओर आते ही रही हैं. जरीना वहाब भी उन्ही कड़ियों में से एक हैं. विशाखापट्टनम के मुस्लिम परिवार में जन्मी जरीना वहाब तेलगू, उर्दू, हिंदी और इंग्लिश भाषा में निपुण थी. परिवार में बहनों और एक भाई के बीच पली बढ़ी जरीना सावले रंग की थी. सत्तर के दशक में गोरा रंग हिरोइन बनने की सबसे पहली और अनिवार्य शर्त हुआ करती थी. उस दौर में सामान्य रंग और रूप वाली लड़की सपने में भी सोच नहीं सकती थी कि हिरोइन बन सकती हैं.


इस तरह की सोच के बीच आंध्र प्रदेश में जन्मी जरीना वहाब नामक लड़की ने धारा के विपरीत तैरने की ठानते हुए पुणे स्थित फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया में दाखिला ले लिया. स्कुल में पढ़ने वाली जरीना ने इस संस्थान का विज्ञापन देखकर आवेदन किया था. जरीना का एडिशन हो गया, लेकिन उनकी राह आसान नहीं थी. उनके सामान्य लुक को लेकर कई बातें उन्हें सुनाई गई. कहते हैं कि राज कपूर ने भी जरीना को देख कर कह दिया था कि वे अभी हिरोइन नहीं बन सकती हैं, लेकिन जरीना ने  इसे चैलेंज के रूप में लिया और शो- मैन को गलत साबित किया.


एफटीआईआई  से निकलने के बाद जरीना का संघर्ष शुरू हो गया. व्यावसायिक फिल्म बनाने वाले निर्माता- निर्देशकों को जरीना में 'हिरोइन मैटेरियल' नजर नहीं आया और वे उन्हें छोटे- मोटे रोल से ज्यादा देने के लिए भी तैयार नहीं थे.



इसके पहले एक बेहतरीन अवसर जरीना के हाथ से निकल गया. फिल्म 'गुड्डी' के लिए निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी ने जरीना के नाम पर विचार किया था क्योंकि उन्हें अपनी फिल्म के लिए गर्ल नेक्स्ट डोर जैसी अभिनेत्री चाहिए थी, जरीना में ये सारी खूबियां थी. साथ ही वे अच्छा अभिनय भी कर लेती थी. लेकिन अंत में इस रोल के लिए ऋषिदा ने जया बच्चन को चुना.



राज कपूर की फिल्म और 'गुड्डी' के हाथ से निकलने के बावजूद जरीना निराशु नहीं हुई क्योंकि कुछ कर गुजरने की धुन उन पर हावी थी. आखिरकार उन्हें पहला अवसर बॉलीवुड की एक बड़ी हस्ती के जरिये ही मिला. जरीना को पता चला कि देव आनंद अपनी नई फिल्म 'इश्क इश्क इश्क' (1974) के लिए एक नए चेहरे की तलाश में हैं. यह रोल फिल्म की नायिका जीनत अमान की बहन का था. जरीना सीधे मेहबूब स्टूडियो जा पहुंची और स्क्रीन टेस्ट दिया. उनका चयन हो गया और फर्स्ट ब्रेक मिला.



'इश्क इश्क इश्क' बुरी तरह फ्लॉप रही और जरीना को नोटिस भी नहीं किया गया. उन्हीं दिनों राजश्री प्रोडक्शन वाले नए कलाकारों के साथ काम करना पसंद करते थे. उनकी फिल्मों की कहानी भी गांव और ग्रामीणों के इर्दगिर्द घुमती थी. उन्हें अपनी नई फिल्म 'चितचोर' (1976) के लिए हिरोइन की तलाश थी. घर बैठ जरीना को इस फिल्म का ऑफर मिला.



जरीना ने पहले ही 1974 में अपने करियर की शुरुआत प्रेमा के रोल से की हो लेकिन 1976 की फिल्म चितचोर में निभाए गये गीता के किरदार ने उन्हें न सिर्फ पहचान दिलाई बल्कि सफलता का स्वाद भी चखाया.



इस फिल्म का निर्देशन बासु चटर्जी कर रहे थे. कहानी के मुताबिक गांव में रहने वाली जरीना को शहर में रहने वाली लड़के से प्यार हो जाता हैं. जरीना के हीरो थे अमोल पालेकर. मधुर संगीत, उम्दा कहानी, शानदार अभिनय और बासु का जादुई निर्देशन का कुछ ऐसा कॉम्बिनेशन बना कि फिल्म दर्शकों को बेहद पसंद आई. उस समय मल्टीस्टारर और बड़े बजट की फिल्मों की धूम थी. ऐसे में 'चितचोर' जैसी छोटे बजट की फिल्म की सफलता ने सभी का ध्यान खिंचा. बाद में अमोल पालेकर के साथ भी जरीना ने कुछ फ़िल्में की और राजश्री प्रोडक्शन के बैनर तले भी उन्हें कई उम्दा फ़िल्में करने को मिलीं.



1977 में आई फलम 'घरोंदा' में उन्होंने अपने किरदार को बड़े सलिके से निभाया, अमोल पालेकर के साथ उनकी जोड़ी को खूब पसंद किया गया. 1979 में राजश्री प्रोडक्शन की और फिल्म 'सावन को आने दो' में जरीना रानी के किरदार में नजर आई. इस बार उनकी जोड़ी अरुण गोविल के साथ बनी और निर्देशन था कनक मिश्रा का. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका सा मचा दिया. एक जमींदार की बेटी और संगीतकार की प्रेमिका रानी के किरदार को ऐसा जिया की मानो फिल्म ना हो कर हकीकत हो. पर फिल्म के सफल होने के बावजूद वह बॉलीवुड में वो मुकाम न पा सकी जिसकी वो हक़दार थी.

फिल्म इंडस्ट्री में अक्सर यह देखने को मिलता है कि प्रतिभा के साथ न्याय नहीं हो पाता हैं. ऐसा जरीना के लिए भी कहां जा सकता हैं. जरीना से बड़े स्टार्स और बैनर ने सदैव दुरी बनाए रखी. सत्तर और अस्सी के दशक के हीरो कुछ खास हीरोइनों के साथ ही फ़िल्में करते थे. ऐसे में जरीना को बतौर हिरोइन अपना अस्तित्व बनाए रखने में कड़ा संघर्ष करना पड़ा. वे इसमें कुछ हद तक सफल भी रहीं. बिना किसी बड़े स्टार के सहारे उन्होंने अपनी पारी खेली.



हर वर्ष उनकी दो- तीन फ़िल्में आती रही, जिनमें वे अपने अभिनय की चमक बिखेरती रही. 'अनपढ़' (1978), 'गोपाल कृष्ण' (1979), 'नैया' (1980), 'सितारा' (1980), 'तड़प' (1982) जैसी फिल्मों से जरीना अपनी उपस्थिति दर्ज कराती रही. इनमें से कुछ फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर सफलता भी मिली.


जरीना ने इस दौरान दक्षिण भारतीय की कई फिल्मों में भी अभिनय किया और कमल हसन जैसे नायक की भी नायिका बनी. हर कलाकार चाहता हैं कि वह स्क्रीन पर तरह- तरह के रोल निभाए जिससे उसका विकास भी हो. एक जैसे रोल निभाते हुए मन उबता जाता हैं. जरीना के साथ भी यही हुआ. जब उन्हें लगा कि उन्हें ऑफर हो रही भूमिकाओं में वैरायटी नहीं हैं तो उन्होंने काम लेना कम कर दिया. 1986 में फिल्म 'कलंक' का टीका के सेट पर जरीना की मुलाक़ात आदित्य पंचोली नामक शख्स से हुई जो फिल्म में अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रहा था. यह मुलाक़ात बड़ी ही ड्रामेटिक रही.पहली मुलाक़ात से ही दोनों एक- दुसरे को पसंद करने लगे और 20 दिन बाद दोनों ने शादी कर ली.
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इस शादी को लेकर काफी कुछ कहा गया क्योंकि उस समय जरीना नामी कलाकार थी तो आदित्य का नाम कई लोगों के लिए अपरिचित था. दोनों की उम्र में 6 वर्ष का अंतर भी हैं. जरीना से शादी करने का फायदा आदित्य को पहुंचा और उन्हें पहचाना जाने लगा. बाद में आदित्य ने कई फिल्मों में काम किया और जरीना ने हाउसवाइफ की भूमिका को निभाना पसंद किया.


शादी के बाद वो बीच बीच में फ़िल्में करती रही हैं पर 2004 में फिल्म 'ये दिल मांगे मोर' से उन्होंने अपना रुख पूरी तरह चरित्र भूमिका की तरफ कर लिया. इस फिल्म में उन्होंने आयशा टाकिया की मां की भूमिका निभाई. अगले साल 2005 में सुभाष घई निर्देशित फिल्म 'कृष्णा' में उन्होंने विवेक ओबेरॉय की मां की शसक्त भूमिका निभाई. भले ही ये फिल्म असफल हो गयी पर उन्हें मां के रोल में खूब सरह्जा मिली. 2010 में करन जोहर की मां के अच्छी दोस्त होने के कारण उन्होंने करन जोहर की फिल्म 'माय नेम इज खान' में शाहरुख़ की मां रजिया खान की भूमिका करना स्वीकार किया. फिल्म में भले ही उनका रोल छोटा था पर उन्होंने अपनी इस छोटी भूमिका के बीच भी जानदार अभिनय किया. पिछले वर्ष आयी 'अग्निपथ' में भी करण ने उन्हें ऋतिक की मां की भूमिका दी जिसे उन्होंने बड़ी ख़ुशी से निभाया. इस साल उनकी विश्वरूपम रिलीज हो रही हैं जिसमें वो अपने नायक रह चुके कमल हसन के साथ एक चरित्र भूमिका में हैं. जरीना ने फिल्मों के साथ टीवी जगत में धारावाहिकों में भी अपने अभिनय की छाप बिखेरती रही हैं. जिनमें यहां मैं 'घर घर खेली', 'आस प्रतिभा', मायका' (जी टीवी सोप) 'आस' मोहिनी मल्होत्रा और 'विरुद्ध'- वसुधा मदर (सोनी टीवी) में प्रमुख हैं.